कविता

शिव

हर श्वास में है शिव,
हर आस में हैं शिव,
विश्वास में है शिव,
शिव ही है संरक्षक ।

अंतस प्रेरणा है शिव,
प्रेषक तत्व भी है शिव,
फलीभूत संकल्प है शिव,
शिव ही हैं मार्गदर्शक ।

जन्म उत्पत्ति है शिव,
अटल मृत्यु भी है शिव,
अनाहत नाद है शिव,
शिव ही है मोक्षकारक ।

आत्म बंधन है शिव,
प्राण प्रबंधन हैं शिव,
“आनंद” मिलन है शिव,
शिव ही है व्यवस्थापक ।

भूतकाल है शिव,
वर्तमान भी है शिव,
मंगलकारी है शिव,
शिव ही है कर्म संचालक ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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