नो बीमा, नो पेट्रोल
नो बीमा, नो पेट्रोल, सड़कों पे फिर कैसा रोल?
नियम सबके लिए हैं, क्यों हों उनमें कोई होल?
वाहन ले निकल पड़े जब, जिम्मेदारी भूल गए,
अपनी ही नहीं, राहगिरों की सुरक्षा से दूर गए।
बीमा सिर्फ कागज़ नहीं, विश्वास की वो ढाल है,
दुर्घटना की घड़ी में, परिवार का संबल हाल है।
पेट्रोल बिन रथ न दौड़े, बीमा बिन सफ़र अधूरा,
नियमों का सम्मान करेंगे, तब बनेगा भारत पूरा।
सड़कें केवल राह नहीं हैं, जीवन की यह डोर हैं,
ये “नो बीमा, नो पेट्रोल”, जिम्मेदारी की ओर है।
आओ मिलकर प्रण लें, नियमों का सम्मान करें,
सुरक्षित यात्रा व जीवन, देश का अभिमान करें।
— संजय एम तराणेकर
