भारत का बेटा खड़ा
सभी डरे थे देखकर, संकट का विस्तार।
भारत का बेटा खड़ा, लेकर दृढ़ हुंकार॥
संयमी हवा में रहा, मन में रहा विवेक।
नष्ट वीर ने कर दिया, दुश्मन तब हर एक॥
आँधी आई तेज जब, डिगा नहीं विश्वास।
भारत माँ के लाल ने, रखी देश की आस॥
सीमा पर जो वीर है, उसका ऊँचा मान।
उसके साहस से सदा, सुरक्षित हिंदुस्तान॥
मातृभूमि की आन पर, जीवन किया निसार।
वीरों के बलिदान से, गौरवमय संसार॥
गगन गूँजता शौर्य से, धरती बनी महान।
वीर जवानों ने लिखी, साहस की पहचान॥
देश पुकारे जब कभी, वीर न करते देर।
मातृभूमि की रक्षा में, आगे बढ़ते शेर॥
शौर्य नहीं केवल बल, संयम भी हथियार।
वीर वही जो जीत ले, संकट बारंबार॥
धुआँ हुए पल में सभी, दुश्मन के अरमान।
भारत के रणबाँकुरे, बनकर खड़े चट्टान॥
सीमा पर प्रहरी खड़ा, लेकर मन में मान।
उसके कारण चैन से, सोता हिंदुस्तान॥
वह न संकट में झुका, नहीं हुआ भयभीत।
अपने दम पर है लिखी, साहस की नव-रीत॥
वीर हृदय में देश का, बसे सदा सम्मान।
राष्ट्रधर्म की राह पर, अर्पित तन-मन-प्राण॥
वीर देश के जब खड़े, सीमा पर तैयार।
तब तक दुश्मन सोच भी, सके न कोई वार॥
वीरों की गाथा सदा, गाए हिंदुस्तान।
उनके साहस से अमर, भारत का सम्मान॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
