कविता – माँ और पापा-जीवन के दो अनमोल स्तंभ
माँ के बिना घर की हर दीवार बिखर जाती है,
पापा के बिना तो पूरी दुनिययाँ ही उजड़ जाती है।
माँ की ममता से घर में खुशियों के दीप जलते हैं,
पापा की छाँव में ही सपनों के रास्ते निकलते हैं।
माँ की गोद में हर दर्द सिमटकर सो जाता है,
पापा का हाथ सिर पर हो तो डर भी खो जाता है।
माँ आँसुओं को पढ़कर बिना कहे समझ जाती है,
पापा अपनी तकलीफ छिपाकर मुस्कान दे जाते हैं।
माँ घर की धड़कन है,पापा उसकी पहचान हैं,
माँ प्रेम का सागर है,पापा साहस की उड़ान हैं।
माँ से जीवन में अपनापन और संस्कार मिलते हैं,
पापा से संघर्षों में जीतने के अधिकार मिलते हैं।
माँ रूठे तो घर का हर कोना उदास हो जाता है,
पापा रूठें तो जीवन का विश्वास डगमगा जाता है।
माँ की दुआओं से हर मुश्किल आसान लगती है,
पापा की मौजूदगी से हर राह मेहरबान लगती है।
माँ के बिना घर का आँगन सूना-सूना रह जाता है,
पापा के बिना जीवन का हर सहारा खो जाता है।
किशन माँ और पापा केवल रिश्ते नहीं,ईश्वर का वरदान हैं
इनके चरणों में ही स्वर्ग,इनसे ही अपना जहान है।
— किशन सनमुखदास भावनानी
