सावधान रहो, समझदार रहो, सुरक्षित रहो
चोर को अवसर दोगे,तो घर का सुकून लूट जाएगा,
झूठ को जगह दोगे,तो विश्वास का दीप बुझ जाएगा,
लालच को मन में पालोगे,तो चैन कहीं खो जाएगा,
गलत इंसान पर भरोसा,जीवन भर रुलाएगा।
मीठी बातों के पीछे छिपा,हर चेहरा सच्चा नहीं होता,
मुस्कानों के हर पर्दे के पीछे,अपना रिश्ता नहीं होता,
हर हाथ मिलाने वाला,वफ़ा निभाने वाला नहीं होता,
हर करीब आने वाला,दिल से चाहने वाला नहीं होता।
जहाँ स्वार्थ का डेरा हो,वहाँ रिश्ते टूट जाते हैं,
जहाँ झूठ का पहरा हो,वहाँ अपने रूठ जाते हैं,
जहाँ लालच का राज हो,वहाँ सपने छूट जाते हैं,
गलत लोगों के संग चलकर,अच्छे रास्ते भी छूट जाते हैं।
इसलिए हर बात पर आँखें मूँदकर ऐतबार मत करना,
अनजाने वादों पर अपने सपनों का व्यापार मत करना,
किशन पहचानो कर्म और चरित्र,सिर्फ़ शब्दों से प्यार मत करना
अपनी शांति और सुरक्षा से कभी खिलवाड़ मत करना।
— किशन सनमुखदास भावनानी
