क्षणिकाएं : शब्द श्रंखला – शान्ति
१) शान्ति को कमजोरी न समझना
यह है अदम्य शक्ति की निशानी
कभी-कभी उज्जवल कल के लिए
झुक जाने में कुछ बुराई नही ।
२) केवल आंख मींच लेने भर से
जरूरी नही शांति का भाव जागे
मन तो सरपट दौड़ लगा रहा है
भले आप सोए हो या रहो जागे।
३) भाग -दौड़ भरी इस दुनिया में
आत्म संतुष्टि जाने कहां खो गयी
बढ़ती आवश्यकताओं के बोझ तले
शान्ति की बात तो बेईमानी हो गयी
४) सालों-साल से जारी है भीषण युद्ध
पीछे हटने को न कोई तैयार
कहते हैं यह सब है शांति के लिए
करते एक-दूजे पर ताबड़तोड़ वार।
५) जो पास है उससे संतुष्ट न होते
शुरू कर देते भागम -भाग का दौर
मन को शांति मिले भी तो कैसे
ख्वाहिशों का है न कोई ओर-छोर।
६) नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत में
चाचा चौधरी ने कितने पापड़ बेले
इस बार भी हाथ में कुछ न आया
बना मज़ाक व तमाम दंश भी झेले।
— नवल अग्रवाल
