कुंडलिया छंद
जनता अपनी रो रही, नेता करते लूट।
सत्ता अपनी सो रही, चोर पा गए छूट॥
चोर पा गए छूट, घोटाला निस दिन करे।
देश को रहे नोच, गरीब घुट-घुट कर मरे॥
कह दिनेश कविराय, त्याग बिन काम न बनता।
जब अपने पर आय, तभी जागे है जनता॥
दिनेश”कुशभुवनपुरी”
जनता अपनी रो रही, नेता करते लूट।
सत्ता अपनी सो रही, चोर पा गए छूट॥
चोर पा गए छूट, घोटाला निस दिन करे।
देश को रहे नोच, गरीब घुट-घुट कर मरे॥
कह दिनेश कविराय, त्याग बिन काम न बनता।
जब अपने पर आय, तभी जागे है जनता॥
दिनेश”कुशभुवनपुरी”
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अच्छी कुंडली !
बहुत खूब , किया बात है .