मां की स्तुति में धनुषाकार पिरामिड
दे माता आशीष हो कल्याण भवतारिणी दुष्ट संहारिणी जय मां जगदम्बे मैं ज्योति जलाऊं आरती गाऊं पुजूं तुझे नमन दुर्गा
Read Moreदे माता आशीष हो कल्याण भवतारिणी दुष्ट संहारिणी जय मां जगदम्बे मैं ज्योति जलाऊं आरती गाऊं पुजूं तुझे नमन दुर्गा
Read Moreहां! सिमटा है मुझमें भी… इक सागर। जो रह कर मौन करता है समाहित खुद में,,, अनगिनत … तर्कों-
Read Moreहां! मुखर हो गई है,,, मेरी लेखनी लिखना नहीं चाहती… यह कविता! कैसे लिखे सुंदरता पर यह जब रोज मरे…
Read Moreबच्चे समझदार हो गए हैं… जब तक थे छोटे, थे हर बात पे लड़ते पल भर में खुश होते, थे
Read Moreधर्मनिरपेक्ष (कहानी में मुहावरों का प्रयोग) *नफरत की आग* से सारा शहर *धू-धू करके जल* रहा था और *गिरगिट की
Read Moreकौन है रचनाकार यहां, है कौन रचे… यहां कविता रचे है कवि… खुद कविता को या कविता करती है …खुद
Read Moreअपने चेहरे को मेकअप की परतों में छुपाते हुए, माधुरी ने खुद को आईने में देखा। सुंदर लग रही थी
Read More-1- जीते जी,,, सम्मान नहीं मरने पर श्राद्ध तर्पण कैसा घोटाला ? -2- अतृप्त मन स्नेह मृगतृष्णा, कैसे कर दूं,
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