माँ का हाथ
बृद्धाश्रम में महफिल जमी हुई थी । इधर उधर की बातें हो रही थी । उन सब में एक वसुधा
Read Moreबृद्धाश्रम में महफिल जमी हुई थी । इधर उधर की बातें हो रही थी । उन सब में एक वसुधा
Read Moreजल थल नभ सब हुए विकल देख धरा पर हाहाकार अनदेखा भय भयभीत करे मानव अब मानव से ही डरे
Read Moreनवरात्रि माँ के लिये श्रद्धा सुमन :— हे जगतजननी माँ हे माँ तेरी मोहनी छवि निहारूं सुधबुध बिसरा कर तेरे
Read More“पापा घर में बैठे बैठे बोर हो गया हूँ । पहले तो आपको ऑफिस वालों ने वर्क एट होम शुरू
Read More“ए बहूरिया मैं मंदिर जा रही हूँ ,तुम भी पीछे से आ जइयो । साथ में पूजन सामग्री भी लेती
Read Moreप्रकृति को जननी हम कहते हैं फिर भी उसकी पीड़ा अनदेखी करते हैं। क्यों बेबस लाचार हुए शिक्षा का दंभ
Read Moreआँखों से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था आँखों में मोतियाबिंद उतर आया था ।वे टटोलते हुए अपनी दवा टेबुल
Read Moreहर रोज इक प्यास है । होठ अक्सर शुष्क रहते हैं , कोल्डड्रिंक्स एवं स्नैक्स से फ्रिज भरा हुआ है
Read Moreप्रीत की रीत काश सीख पाती मीरा जैसी प्रीत जगाती तन-मन की सुधि बिसराऊँ मीरा के रंग में मैं रंग
Read Moreप्रिया से फोन पर बातें करते हुए शौर्य बीच-बीच में कुछ पल के लिए बिल्कुल खामोश हो जाते थे ।
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