दहलीज ( लघुकथा )
“सुनिये ना क्या तय किये आप ; मानती हूँ सारी गलती हमारी है। घर छोड़ने को मैंनें ही आपको मजबूर
Read More“सुनिये ना क्या तय किये आप ; मानती हूँ सारी गलती हमारी है। घर छोड़ने को मैंनें ही आपको मजबूर
Read Moreदीपावली का दीया खरीदने आकाश बाजार में जगह जगह घुम रहा था । पर यादों में बसी मिट्टी की महक
Read More“लगता है दादू की उल्टी सांस चल रही है, पापा ! डॉक्टर को खबर किजिये ।” “नहीं ; अब डॉक्टर
Read Moreगर्मी की छूट्टियां शुरू होने वाली थी , गोलु आज खुद को बहुत हल्का महसूस कर रहा था । ढ़ेरों
Read Moreउसकी प्रिय पत्रिका सुबह सुबह डाक से आ गई थी , स्वरचित लघुकथा को भी स्थान मिला था ,समीक्षक के
Read More“माँ मुझे नींद नहीं आ रही है । कोई कहानी सुनाइये ना ।” “अरे वाह ! मेरा लल्ला कहानी सुनना
Read Moreबुढ़े बीमार पति की आँखों में विछोह का दर्द देख कर वह सहम जाती थी । दिलोदिमाग पर चिंताओं का
Read Moreकुदरत ने दिये कुछ अनमोल घड़ियां घर में बंद सारी दुनिया ढ़ूंढने लगी पैरों के निशां । सीमित संसाधन हैं
Read Moreशिवानी ड्यूटी पर जाने से पहले अच्छी तरह अपने हाथों एवं पैरों को ढंक ली । चेहरे पर मास्क लगा
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