लघुकथा – प्रकाशपुंज
“लगता है दादू की उल्टी सांस चल रही है, पापा ! डॉक्टर को खबर किजिये ।” “नहीं ; अब डॉक्टर
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Read Moreगर्मी की छूट्टियां शुरू होने वाली थी , गोलु आज खुद को बहुत हल्का महसूस कर रहा था । ढ़ेरों
Read Moreउसकी प्रिय पत्रिका सुबह सुबह डाक से आ गई थी , स्वरचित लघुकथा को भी स्थान मिला था ,समीक्षक के
Read More“माँ मुझे नींद नहीं आ रही है । कोई कहानी सुनाइये ना ।” “अरे वाह ! मेरा लल्ला कहानी सुनना
Read Moreबुढ़े बीमार पति की आँखों में विछोह का दर्द देख कर वह सहम जाती थी । दिलोदिमाग पर चिंताओं का
Read Moreकुदरत ने दिये कुछ अनमोल घड़ियां घर में बंद सारी दुनिया ढ़ूंढने लगी पैरों के निशां । सीमित संसाधन हैं
Read Moreशिवानी ड्यूटी पर जाने से पहले अच्छी तरह अपने हाथों एवं पैरों को ढंक ली । चेहरे पर मास्क लगा
Read Moreवक्त के साथ बहुत कुछ फिर बदल जायेगा कड़ोड़ों खर्च कर गंगा निर्मल नहीं हुई बस पचास दिन में गंगा
Read Moreगंगा आरती की स्वरलहरी धाराओं को पार कर इस छोड़ से दुसरे छोड़ तक गूँज रही थी । जान्हवी देवनदी
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