रौशनदान
पिछले दस दिनों से एक अज़ीब सी बेचैनी में रागिनी जी रही थी । अपनी भाभी की माँ से बहुत
Read Moreसम्पूर्ण विश्व कुरुक्षेत्र बना हुआ है, युद्ध करते साल भर से अधिक व्यतीत हो चुके हैं । चहुंओर त्राहिमाम त्राहिमाम
Read More“माँssss…क्या मुझे भी तेरे जैसा ही बचपन मिलेगा ? क्या मुझे भी सीढ़ियों पर भूखे-प्यासे तेरे इंतजार में सोना पड़ेगा
Read Moreगोपाल के मन में बृज की होली देखने की इच्छा हुई । वह व्यग्र और विह्वल से धरा की ओर
Read Moreभाभी की जचगी पर खुशी भाभी के मायके आई थी । कुछ दिनों से नन्हीं के साथ खेलने के बहाने
Read More“क्या कर रही हो डार्लिंग ? मुझे आये हुए आधे घंटे से ऊपर हो गये हैं । एक कप चाय
Read More“सुनो बाबूजी आये हैं, समझ में नहीं आता कि वेज़ किचन अलग से कहाँ बनाऊँ ? हमारे रसोईघर में तो
Read Moreकल मिनाक्षी अपने शादी की सालगिरह पर बृद्धाश्रम गई । वहाँ बूढ़े बेबस और असहाय बृद्धों को देखकर रोना आ
Read Moreघड़ी की सुई एक बजा रही थी ,नींद आँखों से कोसों दूर ।बावड़ा मन किसी निश्चय की घड़ी की तलाश
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