तेरा चेहरा……
एक अनजाना सा चेहरा कुछ धुंधला, कुछ अस्पष्ट सा लिपटा रहता है साये की तरह हर वक्त हर पल है
Read Moreएक अनजाना सा चेहरा कुछ धुंधला, कुछ अस्पष्ट सा लिपटा रहता है साये की तरह हर वक्त हर पल है
Read Moreनशे में झूमता हुआ नींद में उंघता हुआ बदहवास सा बेकाबू हुआ शहर जाने कहां को दौड़ता शहर अधनंगी सी
Read Moreटिकी रहती है दरवाजे पर वो दो जोड़ी आँखें…. टकटकी लगाए देखती है हर आने जाने वाले को करती है
Read Moreबदलते समय में आने लगी है रिश्तों में नयापन… भुलाने लगे हैं लोग संस्कारों की अहमियत मिटने लगी है लाज,
Read Moreअक्सर मौन हो जाती हुँ विचारों के उलझे प्रश्नों से जैसे मन को डसता हुआ सवाल और घायल होता जवाब
Read Moreसंतुष्टि सुनो! व्याप्त है अगर.. तुम्हारे हृदय में मेरे प्रेम का सुर्ख गुलाबी रंग तो तुम जरूर महसूस करोगे मेरे
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