माता-पिता
मेरे लिए तो हर दिन ही मातृ- पितृ दिवस ! पलभर के लिए भी दोनों ओझल नहीं होते मेरी यादों
Read Moreकैसे कहूँ कि प्रेम क्या है मेरे लिए तो माँ की ममता प्रेम है पिता का धैर्य प्रेम है पति
Read Moreआज सोच रही थी तुम्हें उतने में चुपके से बाए आँख के पोर से एक आंसू की बूँद जैसे खुद
Read Moreगाँव की औरतें…. जितना चाहती हूँ उस बात को भूल जाना उतना ही याद आता गाँव की उन हमउम्र औरतों
Read Moreबातों ही बातों में कुछ ऐसी बात हो गई बन गया मन से मन का रिश्ता और हमें खबर तक
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