कविता *बबली सिन्हा 20/01/2021 रात जब रात होती है स्थिर बस एक घड़ी की सुई टिकटिक इस खामोशी के आवरण में तुम्हारा ख्याल मन की Read More
सामाजिक *बबली सिन्हा 04/01/202104/01/2021 महिला सशक्तिकरण समझ नहीं आ रहा कहां से लिखना शुरू करूँ अक्सर लम्बा लिखने से जी चुराती रही हूं मैं, पर अगर Read More
कविता *बबली सिन्हा 04/01/202104/01/2021 यादें बढ़ चली है यादें फिर उन्हीं पुरानी रास्तों पे जिस सफर पे तेरा ख्याल मेरी मंजिल थी बदल चुका है Read More
कविता *बबली सिन्हा 16/12/2020 आंखें…. बड़ी बेकरार थी आंखें तेरे दीदार की प्यासी… बेखबर यार की तस्वीर वर्षों से बसाए इन्तेजार में थी आँखें तुम Read More
कविता *बबली सिन्हा 16/12/2020 प्रेम चुभती है सांसे जब देर करते हो तुम मुझ तक आने में धड़कने धड़कती है तेज बेताब नजरें ढूंढती है Read More
कविता *बबली सिन्हा 20/11/2020 परदा परदे में पैदा होती है परदे के पीछे ही रहती है बढ़ती है निखरती जाती है शर्म के परदे की Read More
कविता *बबली सिन्हा 20/11/202029/11/2020 कविता किस बात पे खफा हुए की आप यूँ बेवफा हुए…. हमने तो की थी इश्क़ बड़ी शिद्दत से ख्वाबों ख्यालों Read More
गीतिका/ग़ज़ल *बबली सिन्हा 17/10/2020 कब से….. ढूंढता रहा मैं जाने तुम्हें कब से भटकता रहा अनजाने से कब से बड़ी मन्नतों से पाया है तुम्हें रब Read More
कविता *बबली सिन्हा 17/10/2020 खबरें झंझोड़ती झकझोरती खबरें कुछ हकीकत कुछ बनावटी प्रभाव तो सभी है डालती कोई मसालों में लपेट रहा कोई चुनावी रंग Read More
कविता *बबली सिन्हा 12/10/2020 महामारी माहमारी 21वीं सदी में भी ये बेचारगी हाय! ये कैसी बेबसी आज की ये आग लगाई किसने गलियां सूनी, सड़कें Read More