यादें
सुनो ! अक्सर तुम्हें सोचते हुए सोचती हूँ कुछ सम्बन्धों के नाम नहीं होते पर फिरभी वो अहम होते हैं
Read Moreअपने ही भीतर कितना ढोता है मन तरह-तरह की बातें और उससे उभरते परिदृश्यों की परिकल्पना को यादों की पगडंडियों
Read Moreसुनो ! अगर तुम न मिलते तो मैं न होती और ना ही मेरी कविताएं…… हाँ सच ! जबसे आए
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