तन्हाई
देते हो तन्हाई फिर उसपर हक जताते हो दूर होकर भी क्यों मेरे अकेलेपन में शामिल होते हो दिल के
Read Moreअपने ही भीतर कितना ढोता है मन तरह-तरह की बातें और उससे उभरते परिदृश्यों की परिकल्पना को यादों की पगडंडियों
Read Moreसुनो ! अगर तुम न मिलते तो मैं न होती और ना ही मेरी कविताएं…… हाँ सच ! जबसे आए
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