गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 01/07/202508/05/2025 ग़ज़ल उस की सता को दबाया जा रहा।शहर सारे को सजाया जा रहा।उस का हंसना गगन को है छू रहा,आंख से Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 28/06/202528/06/2025 ग़ज़ल रंगों का भण्डार है बालम।बस यारों का यार है बालम।छाओं जैसी प्रतिष्ठा है,आभा का श्रृंगार है बालम।दिल से जब खींचे Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 27/06/202527/06/2025 गज़ल तड़क सवेरा मध्याहन एंव शाम ढले का नाम है बापू।सूरज की मर्यादा श्रद्धा शक्ति का वैग़ाम बापू।दीर्घकालिक मैख़ाने के बीच Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 24/06/202524/06/2025 ग़ज़ल क्या से क्या हुए थे क्या से क्या हो गए।नभ में उड़ने वाले मिट्टी में खो गए।निरंतर चलने से ही Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 02/06/202528/05/2025 ग़ज़ल अपने घर को रोज़ सजाया तेरे जाने के बाद।यह दिल फिर ना वापिस आया तेरे जाने के बाद। इस दुनियां Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 01/06/202501/06/2025 ग़ज़ल लौट आओ यार मातृ भूमि को।करते हो यदि प्यार मातृ भूमि को।अब नहीं जाना किसी भी देश में,दे दिया इकरार Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 01/06/202501/06/2025 ग़ज़ल शहर को किस की नज़र ने खा लिया।पहले पन्त्रे की ख़बर ने खा लिया।छांव किस कुएं में जाकर गिर गई,धूप Read More
बाल कविता बलविन्दर ‘बालम’ 23/05/202523/05/2025 बाल गीत तपस्या योग का प्रयोग करना है पढ़ाई में।सुनों बच्चो किनारे तक संवरना है पढ़ाई में। किसी बादल की भांति लेके Read More
गीतिका/ग़ज़ल बलविन्दर ‘बालम’ 16/05/202516/05/2025 ग़ज़ल खड़े दो उभरते पर्वत बर्फ के आबगीने में।कि फनियर झांकते हों जिस तरह बहते सफ़ीने में।कहां तक झूठ एंव सच Read More
कविता बलविन्दर ‘बालम’ 12/05/202514/05/2025 नारी जन्नत की परिभाषा नारी जन्नत की परिभाषा।नारी पीढी की अभिलाषा।नारी मन्दिर में जैसे ज्योति।नारी समता से भरी गोदी।नारी शीतल नीर समन्दर।नारी सचखण्ड में Read More