बाल गीत
शहर में एक मदारी आया।बंदर और रीछ साथ ले आया। डुगडुगी पर ताल बजाकर।थैला धरती ऊपर बिछा कर।जादू वाजा खेल
Read Moreउर्वर भूमि के मालिक उद्यमी कृषक सुन।नींव के सृजक प्रभाकर श्रमिक सुन।तेरे खून पसीनें में तो सूरज है।सुन्दर काएनात तिरी
Read Moreनारी जन्नत की परिभाषा।नारी पीढी की अभिलाषा।नारी मन्दिर में जैसे ज्योति।नारी समता से भरी गोदी।नारी शीतल नीर समन्दर।नारी सचखण्ड में
Read Moreछैल-बांका हृदयगामी तथा लौकिकता में अलौकिकता का स्वरूप है, धरती की नायाब फ़नीली अमानत कश्मीर (श्रीनगर)।- भव्यता प्रकृकि से कलोल
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