गीत – बेकस अदाओं की तेरी दीवानगी
बेकस अदाओं की तेरीदीवानगी ने मार डाला। ओट खिड़की की बचाकरनज़र अपनी देखतीआँखें चुराकर विकल हिरनीमधुर तेरे बोल दोमनुहार बाला।
Read Moreबेकस अदाओं की तेरीदीवानगी ने मार डाला। ओट खिड़की की बचाकरनज़र अपनी देखतीआँखें चुराकर विकल हिरनीमधुर तेरे बोल दोमनुहार बाला।
Read Moreकोयल कुहू- कुहू कर बोली।उठो बालको आई होली।। फूल खिले हैं क्यारी -क्यारी।रंग-बिरंगी है तैयारी।। गेंदा और गुलाब महकते।जिन पर
Read Moreरोटी गरम बाजरे वाली।सरसों की भुजिया से खा ली।। जाड़े के ये अनुपम भोजन।करते नया स्वाद संयोजन।।हरी मटर की बजती
Read Moreआहट विरल वसंत की, रँगे हुए निज चीर।तन -मन वन -वन झूमती, सर सरिता के तीर।। अमराई में गूँजते, कुहू-कुहू
Read Moreडॉट पैन तब न थी नोटबुककिटकंनों की पगडंडी। एक हाथ में तख्ती लटकीकंधे पर बस झोलानाम मात्र की तीन किताबेंचंचल
Read Moreविचारणीय प्रश्न यह है कि उल्लू सदैव टेढ़ा ही क्यों होता है,जिसे सीधा करने की आवश्यकता पड़ जाती है ?
Read Moreउषा जगी प्राची में भोली।लगा भाल पर अरुणिम रोली।। भानु जगाया उठो चलो अब,जाग उठे खगदल हमजोली। चह- चह कर
Read Moreवे हिंदी साहित्य के बहुत बड़े संपादक जी हैं। उन्होंने अब तक पचास साझा काव्य संग्रहों और पचास पुस्तकों का
Read Moreमफ़लर बाँधे शॉल लपेटेनिकल पड़े हैं सूरज दादा। बेलें वृक्ष शांत हैं सारेचादर ओढ़ कुहासे वालीमौन खड़े हैं जमे तुहिन
Read Moreनए वर्ष का नया सवेरा।मिटा गया गत सघन अँधेरा।। मास जनवरी पौष महीना।दूर देह से हुआ पसीना।।भरा कुहासा नहीं उजेरा।नए
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