गीतिका – बचपन
चंचल चपल चुलबुला बचपन।दिखलाता है कितने ठनगन।। खेल खेलना लगता उत्तम,बचपन से जीवन हो शोभन। अम्मा दादी लाड़ लड़ाएँ,बाबा कहें
Read Moreचंचल चपल चुलबुला बचपन।दिखलाता है कितने ठनगन।। खेल खेलना लगता उत्तम,बचपन से जीवन हो शोभन। अम्मा दादी लाड़ लड़ाएँ,बाबा कहें
Read Moreशुद्ध स्वच्छ हो अगर रसोई।रोग न वहाँ रुकेगा कोई।। सब्जी चावल दाल पकाओ।कुछ भी किंतु स्वच्छता लाओ।।शुद्ध तवा हो या
Read Moreघोड़ी सजी दूल्हा नहींबारात के बिन बैंड का क्या? हाथ में चिमटा लिए वीरांगना हैउधर दारू में मगन धुत साजना
Read Moreवास्तव में कुत्ते भेड़ियों के वंशज हैं। दुनिया में सबसे पहले पालतू बनाए गए पशुओं में कुत्तों का प्रथम स्थान
Read Moreमात -पिता गुरुजन सभी ,सबसे ज्येष्ठ पुराण।मर्त्यलोक में कौन है, इनसे श्रेष्ठ प्रमाण।। सेवा जननी-जनक की, सर्व धर्म का सार,न
Read Moreधूप क्यों शरमा रही हैआ गया है मीत अगहन। भोर अँगड़ाई लिएअब उठ गई हैएक पिड़कुलियाभजन गाती उठी हैदाल अरहर
Read Moreजग की शोभा पेड़ – लताएँ।अधिकाधिक हम पेड़ उगाएँ।। जहाँ पेड़ हों शांति समाए।छाया मिले अतिथि ठहराए।।रहते खग पशु भैंसें
Read Moreताश के खेल में भला ‘तुरुप’ या ‘तुरुप के पत्ते’ को कौन नहीं जानता! इसमें एक छोटे से छोटे पत्ते
Read Moreजीवन है तप – साधना , वचन तोल कर बोल।वृथा नहीं गारत करे, रहे सदा अनमोल।। कर्मयोनि ही जानिए, रहे
Read More