झांकी हिंदुस्तान की – भाग 2
कैसे बच्चों को दिखलाऊँ झांकी हिंदुस्तान की बन के आज तमाशा रह गई धरती ये बलिदान की कुछ तो
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Read Moreमित्रो, बचपन में एक गीत बहुत सुना करते थे “आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की”। उसमें हमारे गौरवमय इतिहास
Read Moreकोई फूलों की माला में काँटे पिरो रहा है कोई अपने हाथों अपनी कश्ती डुबो रहा है कुछ भी ना
Read Moreशादी की बीसवीं वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर पति-पत्नी साथ में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे। संसार की दृष्टि
Read Moreस्वतंत्रता हमारा मूलभूत अधिकार है। स्वतंत्रता के कई रूप हैं जिनमें से एक रूप है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। दुर्भाग्यवश हमारे
Read Moreकोई अमीर है, कोई गरीब है बस अपना अपना नसीब है मुलाकात अपनी ना हो सकी तू भी फासलों पे
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