गीत : तुझे ए ज़िंदगी
तेरे ही वास्ते हर रोज मैं सौ बार मरता हूँ, तुझे ऐ जिंदगी हद से ज्यादा प्यार करता हूँ। माँ
Read Moreतेरे ही वास्ते हर रोज मैं सौ बार मरता हूँ, तुझे ऐ जिंदगी हद से ज्यादा प्यार करता हूँ। माँ
Read Moreभारत माँ हम शर्मिंदा हैं कैंपस में लगते नारों पर घर ही में छुपे गद्दारों पर भाईयों के दिल में
Read Moreजेएनयू के परिसर में देखो कैसा अंधेर हुआ कुछ लोगों की नज़रों में इक कुत्ता कैसे शेर हुआ भारत देश
Read Moreप्रिय आत्मन्, हर बार तुम्हें पत्र लिखकर सोचता हूँ कि ये अंतिम पत्र है फिर दोबारा तुम्हें पत्र नहीं लिखूँगा।
Read Moreआओ, हम तुम इंसान बनें गैरों की बातों में आकर क्या कुछ ना हमने गवाया है हमने अपनी नादानी में
Read Moreसस्ताई के वो हाए. ज़माने गुज़र गए, टमाटर प्याज खाए ज़माने गुज़र गए खा रहा हूँ रोटी नमक के साथ
Read Moreमित्र स्नेह का झरना है और मित्र गुणों की खान मित्रों से ही है समाज में हम सब की पहचान
Read Moreघर में इंद्रधनुष की आभा फैल जाती है बिटिया के चेहरे पर जब मुस्कान आती है समग्र सृष्टि जैसे मंगल
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