सावन की पहली बर्षा
पानी की दो बूंद गिरी जगी किरण एक आशा की सूखी हुई धरती और मन ने ली एक अंगड़ाई धरती
Read Moreपानी की दो बूंद गिरी जगी किरण एक आशा की सूखी हुई धरती और मन ने ली एक अंगड़ाई धरती
Read Moreजब कभी सोचता हूं भगवान है कि नहीं तभी एक आवाज दूसरी तरफ से आती है पूछती है छोड़ इसे
Read Moreजो यह काली घटाएं देख रहे हैं न आप इसके उस पार रोशनी की किरण भी है कितना भी अंधेरा
Read Moreयह है कटु सत्य नहीं किसी में दम बाहर आकर खुल के बोले करो रक्षा मेरी पत्नी से मैं हूं
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