गजल
वक्त ने ,हाय ! ये क्या से क्या कर दिया ? देके शोहरत, मुझे गुमशुदा कर दिया । खेल ऐसा
Read Moreनये साल की तुम्हें बधाई ! नव पल्लव आये शाखों पर। हुए चंपई पीपल , पाकर । बाग-बाग रितुराज आगमन,
Read Moreपास उर के मेरे है , मेरी वेदना । आँसुओं से सनी है मेरी कल्पना। हाय संदेह के विष से
Read Moreअगर राष्ट्र हित सोच रहे हो, जयचंदों का दमन करो । छोड़ो पंथ अहिंसा का अब ,धर्मयुद्ध का चयन करो
Read Moreसाँसो का बंधन तोड़ , यादों की गठरी छोड़ , राष्ट्रपंथ के पथिक ,तू भला किधर गया ? एक युग
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