हास्य-व्यंग्य – प्रेमिका के खास सपने
आजकल की प्रेमिकायें प्रेमी को हड़काती हैं। प्रेमी के अंदर वीभत्स रस की उत्पत्ति होने लगती है। बहुत भयंकर डर
Read Moreआजकल की प्रेमिकायें प्रेमी को हड़काती हैं। प्रेमी के अंदर वीभत्स रस की उत्पत्ति होने लगती है। बहुत भयंकर डर
Read Moreवकील साहबएक हत्या के मामले मेंकेस देख रहे थे उनके मित्र जज थेउन्हीं के अदालत मेंमुकदमा चल रहा था वकील
Read Moreप्रतापगढ़ की बिटियाबेहद लाचारपढ़ना चाहती है दुनिया की बच्चियों की तरहवह भी जाना चाहती है स्कूल वह भी उड़ानभरना चाहती
Read Moreवे लोगजो तमंचों के बल परजीतना चाहते हैं जंग उनके अंदरअपनी मौलिक ताकतकमजोर हो चुकी है वे डरें हैंसामने वाले
Read Moreमां तो माँ हैचाहे वो किसी छप्पर में रहती होया किसी राजमहल में वह मां होती हैअपने बच्चों के लिएबच्चा
Read Moreमैं हास्य-व्यंग्य रचनायें लिखता रहता हूँ। लिखना अच्छा लगता है। पाठकगण जब पढ़ कर वाह-वाह कर उठते हैं। मेरा भी
Read Moreनेताजी चुनाव जीत गये। समर्थकों ने माला पहनाया और नेताजी को देशी घी का लड्डू खिलाया। नेताजी गदगद हो गये।
Read Moreबेचारे चुनाव हार गये। बड़ी उम्मीद थी। कर्जा लेकर चुनाव लड़े थे। पूरा दांव लगा बैठे थे। साम, दाम, दंड
Read Moreएक बार सुबह-सुबहपिज़्ज़ा, बर्गर में हुई लड़ाई पिज़्ज़ा बोला–मुझको जो खाता है,वह मेरा गुण गाता है। बर्गर तुनककर बोला–तुझसे ज्यादा
Read Moreबसंती हवा चली हैझूम के चली है।गीत गाकर चली है,खिलखिलाकर चली है। खेतों से होकर,बागों से मिलकर।गलियों में चली है,फूलों
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