क्षणिका
बाँट सकु गम तुम्हारे बस इतनी तमन्ना है, खुशियों में गर शामिल ना करो तो कोई गम नहीं है |||
Read Moreरात के आगोश मे चाँदनी सिमटती गई , चाँद सँग यूँही ठिठोली सी करती रही | आसमाँ को भी गुमाँ
Read Moreमुस्कुराहट मे छुपी क्यों दिखती कभी तन्हाई भी | मुस्कुराना बस इक रस्म-भर तो नहीं होता | ना बाँधो सब्र
Read Moreजीना है मुझे…..हाँ जीना है मुझे भी …मुझे भी जीने दे | ना घोल ज़हर नफ़रतों का यूँ कि….. मुझे
Read Moreचलो एक खूबसूरत ग़ज़ल लिखते हैं | यूंही उलझे-सुलझे शामो सहर लिखते हैं | कहीं ज़िन्दगी की कोई असलियत लिखते
Read Moreहस्तरेखाओं को कभी -कभी ना मानने को जी करता है | जो किस्मत मे ना हो कभी उसे पाने को
Read Moreकहीं छुप – छुप के यूँही मुस्काता है कोई | खुल ना जाए राज़े उल्फत इसलिए चुप रहता है कोई
Read Moreरहमतों से आपकी बेखबर तो मैं नहीं हूँ | साहिब हो तुम मैं तो बस दास ही हूँ | चाहकर
Read Moreफिर वो सादे से लम्हें खोजता हूँ | जिनमें जीवन जीया खुल के वो बाते सोचता हूँ | बदल गया
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