बचपन
वो बचपन जो कहता ना चुप सा रहता बस बेबाक हँसता | वो बचपन जो दिलाता ऐहसास कि हम हैं
Read Moreकहीं कहा मुझे गंगा मैया कहीं मुझे जीभर के दूषित किया | किसे मैं सुनाऊं अब बर्बादी की अपनी यह
Read Moreरहने दो तुम यह सब सह नहीं पाओगे | किसी की दर्द भरी आहें तुम सुन नहीं पाओगे | तुम्हे
Read Moreफिर होगा सागर मंथन, तुम बस इक मजबूत ढाल बन जाओ | हर युग के रावण के संहार के लिए
Read Moreएक कटाक्ष यह भी .. यूं तो हम सब बुद्धिजीवी दूसरों को समझाने या दोष निकालने में तत्पर रहते हैं
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