मुक्तक
इस बार पाकिस्तानी नक़्शा, पुनः बदलना चाहिये,बलूचिस्तान स्वतंत्र देश हो, पीओके आना चाहिये।भारत की सीमाओं का, निर्धारण पुनः करना होगा,हिंगलाज
Read Moreकभी विचार करता हूँ कि क्यों एक राजकुमार घर छोड कर चल पडता है, कष्ट सहता है और बुद्ध बन
Read Moreतानाशाही का अंत हो गया, अबकी पश्चिम बंगाल में,कमल पुष्प का उदय हुआ है, अबकी पश्चिम बंगाल में।बांग्लादेशी घुसपैठियों रोहिंग्याओं
Read Moreकिस क़दर टूटा हूँ, तुमको क्या बताऊँ,जिस्म छलनी छलनी, तुमको कैसे बताऊँ? जबसे दी तुमने क़सम भूलने की,दिया था वास्ता
Read Moreदिनांक 28.04.2026, दिन मंगलवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में विद्यार्थियों के लिए बाल साहित्य
Read Moreउम्र का यह दौर चौथा, हम तन्हा रह गये,रिश्तों को सँवारा नही, अब तन्हा रह गये।पंख मिले बच्चों को, निज
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