व्यंग्य कविता – भ्रष्टाचार का नतीजा भुगत रहा हूं
पूरे सेवाकाल में भ्रष्टाचार किया हूं घर परिवार को शानो शौकत दिया हूं रिटायर्ड हो बहुत बीमार हुआ हूं भ्रष्टाचार
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Read Moreजमीन से शासन को चुना लगाने माहिर हूं शासन या रेल्वे में जमीन अधिग्रहण मामले में सफाई से लंबा चूना
Read Moreवैश्विक स्तरपर भारत बहुत तीव्रता से प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य शिक्षा इलेक्ट्रॉनिक परिवहन सहित अनेक क्षेत्रों में विकास की गाथा लिख कर
Read Moreशासकीय रिकॉर्ड में मैं क्लीनचिट हूं दस्तावेजों में मेरे नाम कुछ भी नहीं है यह बंगला मेरे मौसेरे भाई के
Read Moreअपने इतने सालों की मौजमस्ती वाली सेवा जिसमे रोज़ रात पार्टी लिया हूं गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया
Read Moreकिसी से ज्ञान प्राप्त करना है तो अपना ज्ञानवर्धन कर आगे बढ़ना है तो किसी में अटका काम निकालना है
Read Moreगोंदिया – वैश्विक स्तरपर यह बात एकमत सर्वमान्य है कि भारतीय बौद्धिक क्षमता की कुशलता का जवाब नहीं है जिस
Read Moreमैं लोगों को बहुत ज्ञान बांटता हूं उदाहरण सहित नसीहतें देता हूं सचेत रहने की सलाहें देता हूं पर मैं
Read Moreबड़े बुजुर्गों की कहावत सच है कि हाथी के दांत दिखाने खाने के और हैं मैं भी मतलबी दोगला स्वार्थी
Read Moreजब मैं माता-पिता छोटी बहन का खालीपन महसूस करता हूं मुझे रात भर नींद नहीं आती फिर मैं बहुत रोता
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