कुण्डलिया छंद
(1) वृन्दावन अरु अवध में, ऐसे संत विरक्त, उनके चरण सरोज रज, मस्तक धारे भक्त | मस्तक धारे भक्त, भेद
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Read Moreसावन की बौछार में, भीगा है संसार सखियाँ झूला झूलती,सुने मेघ मल्हार | सजधज सखियाँ आ रही,कर सोलह शृंगार, सावन
Read Moreप्रेम पूर्ण व्यवहार से, बढ़ता प्यार अपार, मधुर वचन से आदमी, जीत सके संसार | शब्दों के क्या अर्थ हैं,
Read Moreकूद रहा हूँ , गिर न पडूँ मैं , मुझे पकड़ना पापाजी ऊपर से मैं कूद रहा हूँ मुझे
Read More(1) मंगलमय हो आपका, आया फिर नव वर्ष अच्छे दिन आये तभी, जीवन में उत्कर्ष | जीवन में उत्कर्ष, कर्म यदि
Read More(1) गंगा मात्र नदी नहीं, समझे इसका सार गंगा माँ को मानते जीवन का आधार | जीवन का आधार, इसी
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