हे डमरूधर हे शशिशेखर
हे डमरु धर हे शशि शेखर,हे गंगाधर हे अभयंकर |पीकर के गरल सरस करते,जग-जीवन को जड़ चेतन को | तर
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Read Moreयादों का आंगन 💐💐💐💐 मेरे बचपन का घर आंगन रह रह के मुझे याद आता है | जी चाहता है
Read Moreयाद बहुत आता है 💐💐💐💐💐💐💐💐 माँ-बाबुल बचपन घर- आंगन कितना तरसाता है | मुझको वह बचपन का आँगन याद बहुत
Read Moreचंदा मामा रूप तुम्हारा मुझे लुभाया करता है | घटना- बढना निश दिन तेरा मुझ में अचरज भरता है |
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