मेरे मन में आओ
कभी तो मेरे आंगन में आओ । या फिर खुला दामन में आओ ।। टूटते हुए बिखरते हुए मंजिल, धड़कते
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Read Moreदुनिया यह दुनिया मृतक शरीर का मज़ार बस । प्यार की पाठशाला में हो जाए पल भर प्यार बस ।।
Read Moreअपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेना, किसको अच्छा लगता है ! ‘आ
Read Moreलू चल रही है लू लग रही है… शहरों में भी ख्वाहिशों में भी… पसीना से लथपथ नीम के नीचे
Read Moreसुबह होती है शाम होती है दिन आता है रात जाती है धूप निकलती है फिर अस्त होती है… इस
Read Moreदेश शहर है प्यारा अपने ही समाज से है प्यार । चारों धाम से सुखमय मुझको मेरा घर परिवार ।।
Read Moreप्रलय महाप्रलय की ये रात है । यह कलयुग की करामात है ।। विनाश महाविनाश की महाकाल ! छेड़ती प्रकृति
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