नव वर्ष आया
नव वर्ष आया नवग्रह नवरात्रि पार करके । फूल खिला नव प्रभात शुभ रात्रि पार करके ।। नव वर्ष आया
Read Moreनव वर्ष आया नवग्रह नवरात्रि पार करके । फूल खिला नव प्रभात शुभ रात्रि पार करके ।। नव वर्ष आया
Read Moreआंखों के भीतर आंसुओं के मूल ढूंढ रहा हूं…! अनजान में किया हुआ वो भूल ढूंढ रहा हूं…!! खिलने के
Read Moreहरियाली भी यही रास्ते भी यहां खेत भी यही खलियान भी यहां हम दोनों के मिलने की घर भी यही
Read Moreमानस तेरी सूरत तेरी यादें लिखता है । तुम कहती हो.., वो गजलें लिखता है ।। वादा करके न आना
Read Moreएक दीप तेरे नाम का जला रहा हूं । इस तरह मैं दिवाली मना रहा हूं ।। फुर्सत मिले तो
Read Moreमोहब्बत वो बारिश है…, जो बिना सावन बातों में बरसती है.. जो बिना बादल दिलों में गरजती है.. जो बिना
Read Moreकभी तो मेरे आंगन में आओ । या फिर खुला दामन में आओ ।। टूटते हुए बिखरते हुए मंजिल, धड़कते
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