आंखों में मनुहार की भाषा
आजाओ न फ़ागुन में , नवयौवन सा श्रृंगार , तुम्हारा , आँखों मे , मनुहार की भाषा , तुम अलसाई
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Read Moreमुहब्ब्त की , दिल जलाया , और उन्हें भूल गया मैं तो , बड़े दिल सोज लम्हे थे , वो , जिन्हें
Read Moreतुम्हारे दर्द की शिद्दत को जानता हूं मैं हूं। हूं मजबूर मुझसे इसलिए आया नहीं जाता। डूबना चाहता हूं शाम
Read Moreलोग जब हमारे क़रीब होते हैं तो, वो हम को नज़र ही नहीआते हैं, लेकिन जब वो दूर चले जाते
Read Moreजी चाहता है कि तेरी यादों से, मैं भी आज,लिपट कर रो लु , दामन तेरा मुक़्क़दर में नहीं ,
Read Moreयाद आती है तो फिर , हर बात रुला देती है, वो रात चांद तारों की, वो रात रुला देती
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