Author: डॉ. एम.एल. गुप्ता 'आदित्य'

इतिहास

यदि सरदार पटेल प्रधानमंत्री बनते तो भारत का भूगोल अलग होता !

सशक्त राष्ट्र के रूप में स्वतंत्र भारत के निर्माण के इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूँ तो जो एक

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भाषा-साहित्य

जनभाषा में न्याय जनता का जन्मसिद्ध अधिकार है

संविधान निर्माण के समय जो भी स्थितियां या कारण रहे हों, मैं समझता हूं कि संविधान का अनुच्छेद 348 जनतांत्रिक

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राजनीति

रंग लाया हमारा संघर्ष, ‘भारत’ नाम के लिए सरकार ने आगे बढ़ाए कदम।

जी-20 के लिए राष्ट्राध्यक्षों के लिए भारत की माननीय राष्ट्रपति की ओर से तैयार निमंत्रण पत्र में अंग्रेजी में भी

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भाषा-साहित्य

दक्षिण में जो फुफकार रहे, हिंदी विरोधी ये संपोले उत्तर से छोड़े हैं

नेता जो कुछ भी कहते हैं, वह राजनीतिक जमा, घटा या गुणा करके ही कहते या करते हैं। आए दिन

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भाषा-साहित्य

भारत नाम और भारतीय भाषाओं के लिए जंतर-मंतर पर हुंकार !

‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ और ‘जनता की आवाज फाउंडेशन’ द्वारा भारत के नाम और भारतीय भाषाओं से संबंधित विषयों पर देश

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समाचार

भारत नाम और भारतीय भाषाओं को लेकर सत्याग्रह

‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ और ‘जनता की आवाज फाउंडेशन’ द्वारा 25 सितंबर 2022 रविवार को राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर-मंतर, नई दिल्ली

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समाचार

स्वतंत्रता दिवस पर ऑस्ट्रेलिया में साहित्य-संध्या की काव्य-गोष्ठी

भारत के 76 वें स्वतंत्रता दिवस पर 20 जुलाई को भारत के प्रधान कोनसुलावास, हिंदी शिक्षा संघ के साथ साहित्य

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