Author: पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सामाजिक

स्त्री, अस्मिता और वैश्विक संघर्ष : पहचान, प्रतिरोध और परिवर्तन की यात्रा

स्त्री की अस्मिता केवल एक दार्शनिक या साहित्यिक अवधारणा नहीं है; यह उसके अस्तित्व, सम्मान, अधिकार और आत्मनिर्णय की संपूर्ण

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सामाजिक

डिजिटल मीडिया और किशोरियों का मानसिक स्वास्थ्य : अवसर, दबाव और हमारी जिम्मेदारी

डिजिटल युग ने संवाद, अभिव्यक्ति और अवसरों की दुनिया को अभूतपूर्व विस्तार दिया है। आज की किशोरियाँ उस पीढ़ी का

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सामाजिक

सुरक्षित बचपन और सम्मानित स्त्रीत्व : समाज की वास्तविक परीक्षा

किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके ऊँचे भवनों, तकनीकी प्रगति या आर्थिक विकास दर से नहीं होती, बल्कि इस

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सामाजिक

एक जिम्मेदार समाज के रूप में विफल हो रहे हैं हम

हम बात करते हैं एक सभ्य, लोकतांत्रिक और संवेदनशील समाज की — ऐसा समाज जो अपने सदस्यों के अधिकारों, सम्मान

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सामाजिक

महिलाओं के कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता : सामाजिक न्याय, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास का आधार

किसी भी समाज के समग्र विकास का मूल्यांकन इस बात से किया जा सकता है कि वहाँ महिलाओं को शिक्षा,

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सामाजिक

उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ

उत्तर प्रदेश अपने विशाल जनसंख्या, विविध सामाजिक संरचना तथा सामाजिक चुनौतियों के कारण महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिहाज़

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सामाजिक

सुरक्षित महिलाएँ, सशक्त भारत : राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त

भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक ऐसा मूलभूत विषय है जो न केवल व्यक्तिगत अधिकारों का संरक्षण करता है, बल्कि

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सामाजिक

रिश्तों की धूप में पनपती ज़िंदगी: मीडिया, समाज और संवेदनशील भविष्य की तलाश

आज का समय तेज़ रफ्तार का समय है। सुबह आँख खुलते ही मोबाइल की स्क्रीन, नोटिफिकेशन की कतार, व्हाट्सएप के

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सामाजिक

डिजिटल मीडिया, कृत्रिम मेधा और महिला सशक्तिकरण : विकसित भारत के संदर्भ में 

इक्कीसवीं सदी का भारत तीव्र डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ डिजिटल मीडिया और कृत्रिम मेधा (Artificial

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