Author: पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सामाजिक

सोशल मीडिया पर धार्मिक मिथक: विश्वास, भ्रम और भड़काव का महाजाल

भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ आस्था केवल मंदिर की घंटियों या अज़ान की आवाज़ तक सीमित नहीं रही। वह

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सामाजिक

भारत में सामाजिक न्याय और समतामूलक विकास : एक नवीन सामाजिक विमर्श

आज सामाजिक न्याय केवल एक आदर्श वाक्य नहीं रहा — यह वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता, नीति तथा समावेशी

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सामाजिक

आर्थिक असमानता: भारत की सामाजिक चेतना पर बढ़ता संकट

भारत विविधता में एकता का संदेश देने वाला देश है, लेकिन यही देश वर्तमान में आर्थिक असमानता जैसी चुनौती से

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सामाजिक

सामाजिक सुरक्षा में भारत की छलांग : समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज ने पिछले दशक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्र के समावेशी विकास के

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सामाजिक

भारत में कुपोषण : विकास के बीच विद्यमान एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट

आज भारत वैश्विक मंच पर मजबूत अर्थव्यवस्था, तकनीकी प्रगति और मानव संसाधन क्षमता के लिए सम्मानित होता है। लेकिन इसी

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सामाजिक

सामुदायिक संवेदना का क्षरण : क्या हम सामाजिक उत्तरदायित्व भूलते जा रहे हैं?

भारत स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहता है। हमारी सांस्कृतिक परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे

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स्वास्थ्य

किशोरों और मानसिक स्वास्थ्य : एक बढ़ता हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट

भारत आज तेजी से बदल रहा है — तकनीकी रूप से, आर्थिक रूप से और सामाजिक तौर पर विकसित हो

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