सुखांत-दुखांत
असंतोष की वृत्ति का अंत है दुखांत । वहीं इसके विपरीत हमारे जीवन में संतोषपूर्वक स्वीकारोक्ति सदा ही लाती है
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Read Moreआज के समय में शिक्षा का खूब-खूब विस्तार हुआ है। इसके विस्तार के परिणामस्वरूप बालिकाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है।
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