जप, तप, नाम, व्रत
जप, तप, नाम, व्रत, परमार्थसब बेकार से लगते हैं।झूठ, कपट, आँसू, द्वेष, कामसब साकार से लगते हैं।जब जीवन के झंझावातचरमोत्कर्ष
Read Moreजप, तप, नाम, व्रत, परमार्थसब बेकार से लगते हैं।झूठ, कपट, आँसू, द्वेष, कामसब साकार से लगते हैं।जब जीवन के झंझावातचरमोत्कर्ष
Read Moreसुना था, दीवारों के कान होते हैं,मगर अब तो दीवारें ही नहीं हैं।दीवारें नहीं हैं शर्म की,दीवारें नहीं हैं अब
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