अडिग शीश झुक रहे हैं
जमाना आ गया कैसाअहंकारियों का हिय धुक धुक रहा है,समय का दौर देखो आजअडिग शीश झुक रहा है,कथे कहानियां लिख
Read Moreजमाना आ गया कैसाअहंकारियों का हिय धुक धुक रहा है,समय का दौर देखो आजअडिग शीश झुक रहा है,कथे कहानियां लिख
Read Moreनहीं जाना है उस राह मेंजिससे नहीं है मेरा कोई वास्ता,ला देते हैं रोड़े राहों मेंरोक लेते प्रगति वाला रास्ता,मस्तिष्क
Read Moreये सांस कब साथ छोड़ दे,जिंदगी कब मुंह मोड़ ले,में नहीं जानता हुई हैमुझसे कितनी खता,खताएं गिने ही नहींतो पाऊंगा
Read Moreतब मैं भी चल पड़ा था राहों में अपनी मंजिल पाने,खुद के प्रति खुद की जिम्मेदारी निभाने,मगर राहों में मिले
Read Moreहां हम भी खेले थे बचपन मेंनकली मनोरंजन बैंक वाले नोटों से,उछलकूद,धमाचौकड़ी,बाजारी लेनदेन,बड़े बने रहते उम्र के छोटों से,बच्चे आज
Read Moreअपनी पहचान छुपा करकेदल से पहचान बताओगे,खो जायेगा नाम तुम्हारावजूद कैसे दिखाओगे,दल तुमसे है तुम दल से नहींदल बनते और
Read Moreकुछ लोग बहुत ही चतुर चालाक होते हैं,बड़ी आसानी से रिश्तों का मोल लगा लेते हैं,और तथाकथित अपनों कोखुशी खुशी
Read Moreसवाल उठाने से पहले सोच ले अच्छी तरह,यदि कर रहा प्रश्न,बेचैन करने लगी है हकीकत जानने की धुन,तो भूलना होगा
Read Moreबरसों पुरानी व्यवस्था हो गर जमी जमाई,वक्त के साथ की नहीं गर साफ सफ़ाई,तो सड़ांध उठने की संभावना बनी रहेगी,नव
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