मेरी जिंदगी का एक लम्हा !
अपने गाँव से लेकर बनारस तक खुशी पूर्वक शिक्षा लेकर आनन्द पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। तभी एक तूफान
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Read Moreदेखते-देखते नयनो के जरिए हृदय में महल बना लिया। बात करते-करते आवाज़ों के जरिए मुझे दिवाना बना दिया अब तक
Read Moreधरती के अन्दर उदगार उठा जिससे भू-पर्पटी हिलने लगा आपसमें शोर हुआ चारों ओर अफरा – तफरी मचने लगा लोग
Read Moreमनुष्य एक समाजिक प्राणी है जो समाज में रहकर हमेशा आगे बढने का प्रयास करता है। शायद यही प्रयास उसके
Read Moreरह-रह कर मन में क्यों कसक उठ जाती है मेरे दिल पर दर्द की क्यों दस्तक दे जाती है जितनी
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