नवोदय का सफर
मैं कोई लेखक नहीं हूँ, हाँ थोड़ा बहुत शब्दों में शब्दों को एक कतार में रखकर कुछ पंक्तियों का विस्तार
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Read Moreक्या अब मेरे, सुख भरे दिन नहीं लौटेगें। क्या अब मेरे कर्ण , उस ध्वनि को नहीं सुन पायेगें क्य
Read Moreसहसा, अचानक बढ़ीं धड़कन, हृदय में नहीं, धरती के गर्भ में। मची हलचल, मस्तिष्क में नहीं, भु- पर्पटी में। सो
Read Moreमैं कुद्रा रेलवे स्टेशन पर ज्यों ही पहुंचा तभी एक आवाज़ सुनाई दी कि गाड़ी थोड़ी देर में प्लेट फार्म
Read Moreईश्वर भाग्य विधाता ही नहीं बल्कि, इस सृष्टि के पालनकर्ता, रचनाकार हैं। सूक्ष्म से लेकर विशालकाय जीवों में, आत्मा रूप
Read Moreजब तुम मिली मुझे ऐसा लगा। जमाने की सारी खुशी मिल गई। जब तुम मिली,तब मैं ऐसा समझा। जिन्दगी में
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