Author: रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

कवितापद्य साहित्य

निश्छल प्रेम कथा कह रही हो !!

तुमसे जब होता है, नयनोन्मीलन। मुझे ऐसा एहसास होता है। तुम्हारी अधरों के, मधुर कंगारो ने। तुम्हारी ध्वनि की, गुंजारो

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