पैसा-पैसा
कोई दिवास्वप्न देखता है, कोई ख्वाबोंको सजाता है। यही पैसे की बेचैनी, जो सबको भगाता है। जो कीमत इसकी समझता
Read Moreरात के अंधेरे में, नींद का पहरा, मुझ पर होता है। तब स्वप्न, मुझे जगाता है । कर लेता है मुझे,
Read Moreतुमसे जब होता है, नयनोन्मीलन। मुझे ऐसा एहसास होता है। तुम्हारी अधरों के, मधुर कंगारो ने। तुम्हारी ध्वनि की, गुंजारो
Read Moreमानव ही एक मानव को कुछ नहीं समझता। एक दूसरे को नोचने में खुद महान समझता। चाहे वो अधिकारी हो
Read Moreउम्मीद भरा वो सारे पल, अब विखरता जा रहा है। बीत गये सुख भरे पल, दु:ख भरा पल आ रहा
Read Moreआज भी याद है, उसकी हँसीं, मुस्कुराहट अधरों से निकले, वो लब्ज जब, हृदयंगम, होते हैं। तो मैं खो जाता
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