नाविक बन पतवार
एक दूजे की मदद का, कर आदान प्रदान होवे ना इसमें कभी, कोई भी अभिमान मित्रता में न कभी चले,
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Read Moreकाले धन से बित रही, जिनकी हरेक रात होती हरेक दिन वहाँ, सुख की ही बरसात मतलब के सब यार
Read Moreचमचों को आज तक भी, समझ सके ना आप दो मुँह वाला है यही, इक जहरीला साँप प्यार ना पा
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