झुके जगत का माथ
काले धन से बित रही, जिनकी हरेक रात होती हरेक दिन वहाँ, सुख की ही बरसात मतलब के सब यार
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Read Moreचमचों को आज तक भी, समझ सके ना आप दो मुँह वाला है यही, इक जहरीला साँप प्यार ना पा
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