गज़ल
चलते है खुले आसमां में घर लेकर अपने भीतर कितने ही मंजर लेकर खोने के लिए कुछ भी पास नहीं
Read Moreकाले धन से बित रही, जिनकी हरेक रात होती हरेक दिन वहाँ, सुख की ही बरसात मतलब के सब यार
Read Moreचमचों को आज तक भी, समझ सके ना आप दो मुँह वाला है यही, इक जहरीला साँप प्यार ना पा
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