प्रकृति का आँचल
ऊँचे पहाड़ों पर सफर,पुरवाई पवन का शोर।ये हरे- भरे वन हमें,करते भाव – विभोर। कोहरे बादल की छाँव कहीं,कहीं झलकते
Read Moreऊँचे पहाड़ों पर सफर,पुरवाई पवन का शोर।ये हरे- भरे वन हमें,करते भाव – विभोर। कोहरे बादल की छाँव कहीं,कहीं झलकते
Read Moreतानाशाही हुक्मरानों ने,सबका हिस्सा खाया हैं।जनता की नेक कमाई को,अपनी शानो- शौकत में लुटाया हैं।शिक्षा हो या, हक अधिकार,उद्योग हो
Read Moreगजबे शोर था भाईवो भी अजबे दौर था भाईजब बढ़ रही थी महंगाईतब किसने शोर मचाईसत्ता की लालसा पालेअच्छे दिन
Read Moreइस प्राकृति को इंसानों नेबहुत धोखा दिया हैं!वरना ये आसमां टूट करबे मौषम नही बरसते!गर्मी बस शुरुआत हुई,की लोग हाय
Read More