तानाशाही हुक्मरान
तानाशाही हुक्मरानों ने,
सबका हिस्सा खाया हैं।
जनता की नेक कमाई को,
अपनी शानो- शौकत में लुटाया हैं।
शिक्षा हो या, हक अधिकार,
उद्योग हो या, चाहे व्यापार
सबका बंटाधार किया है।
गरीबों की आस तोड़कर,
लोकतंत्र से मुँह मोड़कर,
सरकारी तंत्रों पर कब्जा जमाया है।
सत्ता की चाशनी में डूबकर,
सबने माल मलाई खाया है।
जनता की नेक कमाई को,
अपनी शानो-शौकत में लुटाया है।
जाती मजहब की बातें करके,
नफरत खूब बढ़ाया है।
उभरते भविष्य के सीने पर,
देखो कैसे आग लगाया है।
बढ़ते अन्याय के खिलाफ,
जो उठ रही आवाजों को,
अब क्या डंडे मार कर दबाओगे,
जैसा बीज बोवोगे,
वैसा ही फल पाओगे।
यही तो तेरी तानाशाही,
पूरी दुनिया में जग जाहिर है।
सड़कों पर उमड़ा हुजूम,
अब नव क्रांति को आतुर है।
भ्रष्टाचारी नौकरशाही ने भी,
खूब जुल्म ढ़ाया है।
जनता की नेक कमाई को,
अपनी शानो-शौकत में लुटाया है।
— रेबेल रमेश खटकर
