खोलना तुझको पड़ेगा द्वार अपना
द्वार पर तेरे सुबह आई हुई हैभास्कर की यह छटा / सबसे निरालीमुक्त मन से सप्तरंगी फैलतीकिरणें रिझाएं । खोलना
Read Moreद्वार पर तेरे सुबह आई हुई हैभास्कर की यह छटा / सबसे निरालीमुक्त मन से सप्तरंगी फैलतीकिरणें रिझाएं । खोलना
Read Moreनई सुबह का नया द्वार मैं खोल रहा हूँ ; तुम चाहों तो आ जाना मैं बोल रहा हूँ !
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