सपनों का गांव
ढूंढें कहाँ उस रंग बिरंगे हरे भरे गांव को जो रोज़ सपनों में नज़र आता है नींद में तो दिखता
Read Moreढूंढें कहाँ उस रंग बिरंगे हरे भरे गांव को जो रोज़ सपनों में नज़र आता है नींद में तो दिखता
Read Moreआ गया फिर अब देखो नया साल दे गया खट्टी मीठी कुछ यादें बीता कल ऐसी तबाही मचाई थी कुदरत
Read Moreसिंह की गर्जना थी जिसकी आवाज में दुश्मन भी कांपते थे जब ललकारते थे कवि हृदय अंदर कोमल थे दिल
Read Moreगांव का नाम भी कुछ ऐसा जो सुनने में भी अजीब सा लगता था।छोटी छोटी पहाड़ियों की टेकरी पर स्थित
Read Moreआजकल बेटियों को बचाने पर सबका है जोर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बस एक यही है शोर बेटियां तो अपनी
Read Moreजहां भी देखो हर तरफ हो रहा ब्यापार है खबरें कम पैसे का धंधा बन गया हर अखबार है सकारात्मकता
Read Moreमौत निश्चित है छोड़ेगी नहीं यह सब जानते हैं फिर भी पूरा जोर लगा देते हैं ज़िन्दगी बचाने को पूरी
Read Moreकहने को लोक संस्कृति को दे रहे बढ़ावा लेकिन लोक संस्कृति का हो रहा वहिष्कार लोक कलाकारों का हो रहा
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