तपता मार्च, सूखता पानी: क्या हम असली समस्या से भाग रहे हैं?
सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं, गर्मी की तीखी आहट है, और यही हाल कई शहरों में
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Read Moreमध्य पूर्व में भड़का संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला संकट बन गया है।
Read Moreभविष्य की कल्पना करते ही एक ऐसी दुनिया सामने आती है जहाँ जीवन का लगभग हर पहलू इंटरनेट से जुड़ा
Read Moreबाजार की इस विशाल दुनिया में हम सब किसी न किसी रूप में उपभोक्ता हैं। हमारा पहनावा, हमारा भोजन और
Read Moreभारत की आर्थिक चमक के पीछे एक तीखा विरोधाभास है। एक ओर प्राइवेट जेट और लग्जरी यॉट्स की दुनिया, तो
Read Moreमध्य पूर्व अचानक संघर्ष की भयंकर आग में झुलस रहा है। 6 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान
Read Moreतेल के वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल ने भारत के शहरी जीवन और अर्थव्यवस्था के सामने नया संकट खड़ा कर
Read Moreकभी मानव सभ्यता को खतरा बाहरी प्रदूषणों से था—धुएँ से, प्लास्टिक से, रसायनों से। पर आज सबसे घातक प्रदूषण हमारी
Read Moreलोकतंत्र केवल चुनावों और सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया का नाम नहीं है; यह सम्मान, मर्यादा और संस्थागत गरिमा की
Read Moreकभी-कभी इतिहास के सबसे गहरे प्रश्न एक साधारण-से वाक्य में सिमट जाते हैं। “देना है, तो पाना है” ऐसा ही
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