Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

पर्यावरण

आज का मॉनसून, कल का इतिहास नहीं — भविष्य का फैसला है

प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती; वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर,

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सामाजिक

भूख और बर्बादी के बीच का भारत : थाली में सिमटा हमारा नैतिक पतन

किसी भी भारतीय विवाह, पारिवारिक उत्सव या सामाजिक समारोह की सफलता का पैमाना आज भी व्यंजनों की विविधता और मेजबान

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भाषा-साहित्य

हमारी भाषाएँ मर रही हैं, हम अंग्रेज़ी में उनका श्राद्ध कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट का हालिया प्रश्न — क्या अंग्रेज़ी को भारत की स्वदेशी भाषा माना जा सकता है?—सिर्फ न्यायालय का सवाल

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अन्य लेख

लॉर्ड्स में लिखा भारतीय महिला क्रिकेट का स्वर्णिम इतिहास

क्रिकेट की दुनिया में यदि किसी मैदान को खेल का तीर्थ कहा जाए, तो वह लॉर्ड्स है। यहां जीत केवल उपलब्धि

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पर्यावरण

पुणे की चीख : हम कचरा नहीं संभाल पाए तो शहर कैसे संभालेंगे?

पुणे के मोशी (पिंपरी-चिंचवड़) में 8 जुलाई 2026 को हुआ हादसा केवल एक इमारत का ढहना नहीं, बल्कि हमारे शहरी

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राजनीति

केन की धारा में बहता एक सवाल : क्या इंसान भी विकास का हिस्सा है?

विकास तभी सार्थक है, जब उसकी कीमत किसी की पहचान, आजीविका और अस्तित्व न बने। आज भारत इसी प्रश्न के

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सामाजिक

फ्लैश फ्लड से पहले फ्लैशबैक – एक गलती, पूरी कहानी खत्म

प्रकृति जब रौद्र रूप धारण करती है, तब मनुष्य की सारी शक्ति क्षणभर में प्रभावहीन हो जाती है। मानसून इसका

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