Author: *डॉ. रूपचन्द शास्त्री 'मयंक'

गीत/नवगीत

गाता है ऋतुराज तराने

वासन्ती मौसम आया है,प्रीत और मनुहार का।गाता है ऋतुराज तराने,बहती हुई बयार का।।—पंख हिलाती तितली आयी,भँवरे गुंजन करते हैं,खेतों में

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बाल कविता

बालकविता “आयी रेल”

धक्का-मुक्की रेलम-पेल।आयी रेल-आयी रेल।। इंजन चलता सबसे आगे।पीछे -पीछे डिब्बे भागे।। हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।पटरी पर यह तेज दौड़ता।। जब

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गीत/नवगीत

दोहागीत “फीके हैं त्यौहार”

बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार।।(१)बेकारी में भा रहा, सबको आज विदेश।खुदगर्ज़ी में खो

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गीत/नवगीत

“हार गये हैं ज्ञानी-ध्यानी”

कुहरा करता है मनमानी।जाड़े पर आ गयी जवानी।।—नभ में धुआँ-धुआँ सा छाया,शीतलता ने असर दिखाया,काँप रही है थर-थर काया,हीटर-गीजर शुरू

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गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल “कठिन बुढ़ापा बीमारी है”

हिम्मत अभी नहीं हारी हैजंग ज़िन्दगी की जारी है—मोह पाश में बँधा हुआ हूँये ही तो दुनियादारी है—ज्वाला शान्त हो

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बाल कविता

बालगीत “जोकर खूब हँसाये”

जो काम नही कर पायें दूसरे,वो जोकर कर जाये।सरकस मे जोकर ही,दर्शक-गण को खूब रिझाये।—नाक नुकीली, चड्ढी ढीली,लम्बी टोपी पहने,उछल-कूद

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गीत/नवगीत

गीत “नारी की तो कथा यही है”

अपने छोटे से जीवन मेंकितने सपने देखे मन में—इठलाना-बलखाना सीखाहँसना और हँसाना सीखासखियों के संग झूला-झूलामैंने इस प्यारे मधुबन मेंकितने

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बाल कविता

बालकविता “सबका ऊँचा नाम करूँ”

मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा।मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।—मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा

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गीत/नवगीत

“हर सिक्के के दो पहलू हैं”

“हर सिक्के के दो पहलू हैं”—हर सिक्के के दो पहलू हैं,उलट-पलटकर देख ज़रा।बिन परखे क्या पता चलेगा,किसमें कितना खोट भरा।।—हर

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